Month: May 2023

ऐनीलीनम (Anilinium)

परिचय-        रोगी के सिर में अधिक चक्कर आना और सिर में दर्द होने पर ऐनीलीनम औषधि बहुत उपयोगी है। विभिन्न लक्षणों में ऐनीलीनम औषधि का उपयोग- चेहरे से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी के चेहरे का रंग नीला पड़ जाता है। इस प्रकार के लक्षण से पीड़ित रोगी को ठीक करने के लिए ऐनीलीनम औषधि …

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ऐन्हालोनियम (ANHALONIUM)

परिचय-        ऐन्हालोनियम औषधि मस्कल पदार्थ से बनाई जाती है, मस्कल एक तेज नशीली स्प्रिट है जिसे पल्के फर्टे से खींचा जाता है। पल्के मैक्सिको के आगेव अमेरिकाना (अगेव अमेजीकाना ओर मेक्सिको) में तैयार किया जाता है जिसे वहां मेग्वे (मेग्वे) के नाम से जाना जाता है और मैक्सिको का राष्ट्रीय पेय पदार्थ है। भारतीय …

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ऐंगुस्टुरा वेरा (Angustura vera)

परिचय-            जोड़ों का दर्द जिसके कारण रोगी को चलने-फिरने में बहुत अधिक परेशानी महसूस होती है तथा लकवा का प्रभाव अधिक होता है, रोगी को कॉफी पीने की अधिक इच्छा होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए ऐँगुस्टुरा वेरा औषधि का प्रयोग करना चाहिए।        श्लेष्मकलाओं …

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एनोमेप्सिस कैलीफोर्निका (ANEMOPSIS CALIFORNIC)

परिचय-        एनोमेप्सिस कैलीफोर्निका औषधि श्लेष्म कलाओं (म्युकोस मेम्ब्रेंस) की एक प्रमुख लाभदायक औषधि है। विभिन्न लक्षणों में एनोमेप्सिस कैलीफोर्निका औषधि का उपयोग- नाक से सम्बन्धित लक्षण :- नाक की श्लेष्म कला के पुराने जलन (प्रदाह) के साथ नाक की झिल्ली का ढीलापन तथा अधिक स्राव (नाक से पानी की तरह पदार्थ निकलना) होना तथा …

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एगड्रोग्राफिस पैनीकुलैटा (ANDROGRAPHIS PANICULATA)

परिचय-        एगड्रोग्राफिस पैनीकुलैटा औषधि का प्रयोग कई प्रकार के रोगों की अवस्थाओं तथा रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है जो इस प्रकार हैं-लम्बी ज्वर की अवस्था, जुकाम-खांसी की प्रारिम्भक अवस्था, शरीर के कई अंगों में अधिक कमजोरी आना, बच्चों का यकृत रोग तथा पीलिया (जोंडिस) रोग। विभिन्न लक्षणों में एगड्रोग्राफिस पैनीकुलैटा …

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एण्डरसोनिया – अमूरा रोहितका (ANDERSONIA- AMOORA ROHITAKA)

परिचय-        एण्डरसोनिया औषधि का प्रयोग कई प्रकार के रोगों को ठीक करने के काम आता है जो इस प्रकार हैं-यकृत तथा प्लीहा से संबन्धित रोग, जीर्ण ज्वर, ग्रंथियों से संबन्धित रोग, प्रदर रोग तथा शरीर के सभी अंगों में कमजोरी आना। विभिन्न लक्षणों में एण्डरसोनिया औषधि का उपयोग- मन से सम्बन्धित लक्षण :- यदि …

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ऐनोथेरम (ANATHERUM)

परिचय-           चर्म रोगों से सम्बन्धित लक्षणों को ठीक करने के लिए ऐनोथेरम औषधि बहुत ही उपयोगी है। शरीर के विभिन्न भागों में दर्द होने वाले सूजन, जिसमें पीब पड़ जाती है। ग्रन्थियों में जलन होने पर इस औषधि का उपयोग लाभकारी है। विभिन्न लक्षणों में ऐनोथेरम औषधि का उपयोग- सिर से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी …

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एनागोलिस (ANAGALLIS)

परिचय-      एनागोलिस औषधि एक तरह के वृक्ष के टिंचर से बनाया जाता है। जब रोगी के सारे शरीर में बहुत तेज खुजली होती है और गुदगुदाहट होती है तो इस औषधि का प्रयोग करने से रोग ठीक हो जाता है।         चर्म रोगों को ठीक करने में एनागोलिस औषधि का उपयोग बहुत लाभदायक है। जब …

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ऐनाकार्डियम ओरियेनटेल (Anacardium oriental)

परिचय-        मानसिक कारणों की वजह से होने वाली मस्तिष्क की कमजोर स्मरण शक्ति को ठीक करने के लिए ऐनाकार्डियम ओरियेनटेल औषधि का उपयोग लाभकारी है।        जिन रोगियों की स्मरण शक्ति अधिक कमजोर हो जाती है, मामूली हाल की घटनायें भी याद नहीं रहतीं, जल्दी से कुछ भी समझ में नहीं आता है, रोगी …

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ऐमिल नाइट्रोसम (Amyl nitrosum)

परिचय-           दिल से सम्बन्धित कई प्रकार के रोगों को ठीक करने में ऐमिल नाइट्रोसम औषधि बहुत उपयोगी है विशेष करके तब जब वैजो मोटर (वह शक्ति जो नसों में खून को बहाती है)  की शक्ति शिथिल (ठण्डी) हो जाती है और चेहरा गर्म और सुर्ख हो जाता है, रोगी के चेहरे और सिर पर खून …

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एमिल नाइट्रिक (Amyl nitric)

परिचय-           मिर्गी के दौरे पड़ने के बाद बेहोशी की अवस्था तथा बेहोशी करने वाली दवाओं के कुप्रभावों से पैदा होने वाली बेहोशी को दूर करने की एक बहुत ही अच्छी और लाभदायक औषधि है। किसी भी प्रकार की बेहोशी की अवस्था को दूर करने के लिए एमिल नाइट्रिक औषधि का प्रयोग करना चाहिए। विभिन्न लक्षणों …

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एमिग्डेलस पर्सिका (AMYGDALUS PERSICA)

परिचय-           उल्टी आने की विभिन्न अवस्थाओं में एमिग्डेलस पर्सिका औषधि का प्रयोग किया जाता है जिसके फलस्वरूप उल्टी से सम्बन्धित कई प्रकार के लक्षण ठीक हो जाते हैं। ऐसे रोगी को सुबह के समय उल्टी होती है तथा उसके आंखों में चुभन, मल का रुक जाना तथा रक्तमेह हो जाता है।        यदि किसी रोगी …

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एम्पीलोप्सिस (AMPELOPSIS)

परिचय-        एम्पीलोप्सिस औषधि का प्रयोग गुर्दे में पानी भरने का रोग (रेनल ड्रोपसीस), जलवृषण (हाड्रोसिल.अण्डकोष में पानी भरना) तथा गले का रोगों को ठीक करने में किया जाता है।           हैजे के रोग से पीड़ित रोगी के रोग में यदि शाम के छ: बजे के बाद लक्षणों में वृद्धि हो रही हो तथा साथ में …

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अमोनियम वैलेरियनिकम (AMMONIUM VALERIANICUM)

परिचय-           स्नायुशूल (नाड़ियों में दर्द), सिर में दर्द तथा अनिद्रा रोग (इनसोनिया) से पीड़ित रोगी तथा स्नायु से संबन्धित रोग (नर्वस) और पेट में गैस बनने के कारण दिमागी पागलपन होना। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए अमोनियम वैलेरियनिकम औषधि का उपयोग करना चाहिए।        हमेशा भारी …

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अमोनियम फास्फोरिकम (AMMONIUM PHOSPHORICUM)

परिचय-        पुराने गठिया तथा यूरिक अम्ल से सम्बन्धित लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए अमोनियम फास्फोरिकम औषधि प्रयोग करना चाहिए।         श्वासनली का रोग (ब्रोकाइटिस) तथा हाथ की उंगलियों के जोड़ों पर तथा हाथ के पिछले भाग में होने वाले गांठें तथा चेहरे पर लकवा रोग का प्रभाव, कंधे के …

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अमोनियम म्यूरियेटिकम (Ammounium muriaticum)

परिचय-           खांसी होने के साथ ही यदि छाती से सम्बन्धित कोई बीमारी हो गई हो तो उस रोग को ठीक करने के लिए अमोनियम म्यूरियेटिकम औषधि का उपयोग करना लाभदायक है।           कब्ज को ठीक करने के लिए अमोनियम म्यूरियेटिकम औषधि का प्रयोग लाभदायक है जिसके फलस्वरूप कब्ज ठीक हो जाता है। इस औषधि के प्रभाव …

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अमोनियम पिकरेटस (AMMONIUM PICRATUM)

परिचय-           मलेरिया बुखार तथा स्नायुशूल (नाड़ियों में दर्द-न्युरेलगिया), सिर के पिछले भाग तथा कान के भाग में दर्द, काली खांसी तथा सिर में दर्द (बाइलीओस हैडक)। इस प्रकार के रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए अमोनियम पिकरेटस औषधि का प्रयोग करना चाहिए।        सिर के दाईं भाग की ओर नियमित समय पर होने …

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अमोनियम आयोडेटम (AMMONIUM IODATUM)

परिचय-        अमोनियम आयोडेटम औषधि का प्रयोग तब किया जाता है, जब सांस लेने वाली नली में सूजन (ब्रोकाइटिस) हो जाती है तथा स्वरयन्त्र में सूजन (लेरींगिटिस) हो जाती है और प्रतिश्यायी फुफ्फुसपाक (कैटरल न्युमोनिया), फेफड़ों की सूजन (ओइडेमा ऑफ लंग्स) में किया जाता है जिसके कारण यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है …

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अमोनियम कास्टिकम (AMMONIUM CAUSTICUM)

परिचय-        अमोनियम कास्टिकम औषधि हृदय की गति को बढ़ाने वाली औषधि है। रोगी को बेहोशी की अवस्था (थ्रोम्बोसिस) होने पर, रक्तस्राव (हैर्मोरेज.खून बहना) होने पर, सांप के काटने (स्नेक बाइटस) के बाद शरीर में जहर फैलने पर तथा क्लोरोफार्म के उपयोग के कारण बेहोशी होने पर रोगी को यदि यह औषधि सुंघाई जाए तो …

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अमोनियम कार्बोनिकम (AMMONIUM CARBONCUM)

परिचय-        अमोनियम कार्बोनिकम औषधि का प्रयोग ऐसी स्त्री रोग की अवस्था में किया जाता है, जिसमें स्त्रियां तो स्वस्थ्य जरूर रहती है, लेकिन वे हमेशा थकी हुई और ठण्ड महसूस करती रहती है तथा जो हैजा रोग से पीड़ित हो जाती है, शारीरिक परिश्रम नहीं करती है, कार्य करने के प्रति आलसी स्वभाव की …

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